धर्म के नाम पे लड़ना है लड़ लो
बनानी सरहदें हैं मुल्क की ख़ातिर?, बना लो।
मिटाना चाहते हो? ये सरहदें, ये क़ौमबाज़ी, धर्मलीला?
मिटा दो।
तुम्हारी चाहतों से ये ज़मीन चलती नहीं है।
तुम्हारी हरकतों से ये ज़मीं हिलती नहीं है।
उसे है काटने चक्कर, उसे कुछ ना पड़ी है
बस इतना जानती है वो कि ये सब ख्वामख्वाह है
नहीं तुम मानते मगर वो जानती है कि तुम भी सब बस ख्वामख्वाह हो।
